‘समय संदेश’ की टीम ने मुंबई के परेल इलाके में स्थित राष्ट्रीय मिल मजदूर संघ के कार्यालय का दौरा किया और मिल मजदूरों के लंबे समय से चले आ रहे आवास मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरे के दौरान संघ के नेताओं के साथ विस्तृत बातचीत हुई, जिसमें हजारों मिल मजदूरों को अभी तक घर न मिलने पर गहरी चिंता व्यक्त की गई।
इस बैठक में संघ के प्रमुख पदाधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे, जिन्होंने कार्यकर्ताओं की समस्याओं और सरकार से प्राप्त आश्वासनों के बारे में स्पष्टीकरण दिया।
📍 परेल में बैठक – नेताओं से सीधी बातचीत
‘समय संदेश’ की टीम संघ कार्यालय पहुंची और निम्नलिखित नेताओं से बातचीत की:
सचिन भाऊ अहीर (अध्यक्ष)
गोविंद्रराव मोहिते (महासचिव)
बजरंग चौहान (उपाध्यक्ष)
साईकुमार निकम
शिवाजी काले
मोहन पोल
इसके अलावा, अन्य कर्मचारियों से भी बातचीत हुई, जिसमें कार्यकर्ताओं की वर्तमान स्थिति, सरकारी नीतियों और भविष्य की योजनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।

🏠 “1.15 लाख मिल मजदूरों के पास अभी भी घर नहीं हैं” – एक चौंकाने वाला तथ्य
चर्चा के दौरान गोविंदराव मोहिते ने कहा:
“लगभग 1 लाख 15 हजार मिल मजदूरों को अभी तक घर नहीं दिए गए हैं।”
यह आंकड़ा मुंबई में मिल मजदूरों की आवास समस्या की गंभीरता को दर्शाता है।
🚩 प्रदर्शन के बाद सरकार से मुलाकात
संघ ने इस मुद्दे पर 10 मार्च को एक बड़ा प्रदर्शन किया। इसके बाद 13 मार्च को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात की गई।
इस मुलाकात में सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण बातें कहीं:
शेलू क्षेत्र में भूमि आवंटित की जाएगी
वहाँ नहीं जाना चाहने वाले श्रमिकों को मुंबई में ही घर दिए जाएँगे
मुंबई में घरों के लिए विशिष्ट स्थान निर्धारित किए गए हैं
🌆 मुंबई के बाहर घर – लॉटरी प्रणाली
सरकार की योजना के अनुसार:
पनवेल, ठाणे जैसे स्थानों पर 7000 घर बनाए जा चुके हैं
ये घर लॉटरी प्रणाली के माध्यम से आवंटित किए जाएँगे
लेकिन कई श्रमिक मुंबई छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
❗ “मुंबई छोड़ना नहीं चाहते” – श्रमिकों की भावनाएँ
मिल मजदूरों के लिए मुंबई सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि जीवन का केंद्र है। कई मजदूर वर्षों से यहीं रह रहे हैं और उनका रोज़गार भी यहीं है।
इसलिए:
बाहर जाना मुश्किल
नौकरी पर असर
सामाजिक जीवन पर असर
इसीलिए मजदूर मुंबई में घर चाहते हैं।

🏗️ मुंबई में संभावित स्थल
चर्चा के दौरान, संघ ने मुंबई में उपलब्ध कुछ स्थलों का उल्लेख किया:
एनटीसी लैंड मुंबई
सेंचुरी मिल क्षेत्र
खटाऊ मिल भूमि
बोरीवली क्षेत्र
अन्य कपड़ा मिल क्षेत्र
इसके अतिरिक्त:
एसआरए मरम्मत बोर्ड
आवास बोर्ड
खारलैंड क्षेत्र
धारावी विकास परियोजना
इन सभी स्थानों पर मजदूरों को आवास उपलब्ध कराने की संभावना है।
⚖️ संघ का आरोप – निर्माण विधि के अनुसार नहीं है
गोविंद्राव मोहिते ने कहा:
“सरकार द्वारा कपड़ा श्रमिकों के लिए बनाए गए कानूनों के अनुसार अभी तक निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है।”
इसीलिए संघ ने एक मोर्चा बनाकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की।
👴 वृद्ध श्रमिक – बढ़ती समस्या
कई मिल श्रमिक अब वृद्ध हो चुके हैं:
कुछ का निधन हो गया है
कुछ शारीरिक रूप से कमजोर हो गए हैं
इसलिए वे अक्सर मोर्चों में भाग नहीं ले पाते हैं।
संघ ने सरकार से अनुरोध किया है:
“जब तक श्रमिक जीवित हैं, उन्हें घर उपलब्ध कराए जाएं।”

🏛️ सरकारी आश्वासन – 2-3 वर्षों में समाधान
बैठक के दौरान, एकनाथ शिंदे ने आश्वासन दिया कि:
मजदूरों को अगले 2 से 3 वर्षों में मकान उपलब्ध कराए जाएंगे।
इस आश्वासन से मजदूरों में उम्मीद जगी है, लेकिन संदेह भी बना हुआ है।
📢 संघ का संदेश – “वादे नहीं, क्रियान्वयन चाहिए”
संघ के नेताओं का कहना है कि:
वादे वर्षों से किए जा रहे हैं
लेकिन जमीनी स्तर पर काम धीमी गति से चल रहा है
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा:
“अब हमें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि वास्तविक काम चाहिए।”
📦 बॉक्स न्यूज़ – मुख्य बिंदु
📌 मुख्य बातें:
1.15 लाख श्रमिकों के पास अभी भी घर नहीं हैं
मोर्चे के बाद सरकार से मुलाकात
पनवेल-ठाणे में 7000 घर तैयार
मुंबई में भी जमीन उपलब्ध
2-3 वर्षों में समाधान का आश्वासन
🧭 आगे क्या?
अब महत्वपूर्ण प्रश्न:
क्या सरकार समय पर अपना वादा पूरा करेगी?
क्या श्रमिकों को मुंबई में घर मिलेंगे?
क्या परियोजना तेजी से आगे बढ़ेगी?
🔚 निष्कर्ष
मुंबई के राष्ट्रीय मिल मजदूर संघ द्वारा उठाया गया मिल श्रमिकों के आवास का मुद्दा सिर्फ एक यूनियन का मामला नहीं है, बल्कि लाखों लोगों के जीवन से जुड़ा है।
एकनाथ शिंदे द्वारा दिया गया आश्वासन उम्मीद जगाता है, लेकिन अब इस वादे को हकीकत में बदलने का समय आ गया है।
⚠️ अंतिम संदेश:
“यह शहर श्रमिकों की मेहनत से बना है – अब सरकार का कर्तव्य है कि उन्हें रहने के लिए छत मुहैया कराए।”








